Saturday, May 30, 2020

क्यों और कितनी महत्वपूर्ण है शिक्षा ??


शिक्षा का महत्त्व

ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी डिक्शनरी के अनुसार, ज्ञान का अर्थ है शिक्षा या अनुभव के माध्यम से तथ्य, सूचना और कौशल प्राप्त करना। ज्ञान किसी विषय के सैद्धांतिक या व्यावहारिक समझ का गठन करता है। मानव समाज के वंशज, वानर व् अन्य जानवरों से केवल ज्ञान और उपयोग के कारण अलग हैं। ज्ञान केवल शिक्षा के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

यह बिना कहे ही जाना जा सकता है कि समानता बनाने तथा आर्थिक स्थिति के आधार पर बाधाओं तथा भेदभाव को दूर करने के लिए शिक्षा बहुत आवश्यक है। राष्ट्र की प्रगति और विकास सभी नागरिकों की शिक्षा के अधिकार की उपलब्धता पर निर्भर करता है। एक पाकिस्तानी स्कूल छात्रा मलाला यूसुफजई को शिक्षा के अधिकार के लिए तालिबान से धमकी मिली थी। तालिबान में उसके सिर पर गोली मार दी गई थी लेकिन इसके बाद भी जीवित रही और तब से वह मानव अधिकार, महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के अधिकार के लिए एक वैश्विक पक्षधर बन गई है।

सर्वश्रेष्ठ धन 

विद्या एक ऐसा धन है जिसे ना तो कोई चुरा सकता है और नाही कोई छीन सकता। यह एक मात्र ऐसा धन है जो बाँटने पर कम नहीं होता, बल्कि की इसके विपरीत बढ़ता ही जाता है। हमने देखा होगा कि हमारे समाज में जो शिक्षित व्यक्ति होते हैं उनका एक अलग ही मान सम्मान होता है और लोग उन्हें हमारे समाज में इज्जत भी देते हैं। इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि वह एक साक्षर हो प्रशिक्षित हो इसीलिए आज के समय में हमारे जीवन में पढ़ाई का बहुत अधिक महत्व हो गया है। इसीलिए आपको यह याद रखना है कि शिक्षा हमारे लिए बहुत जरूरी है इसकी वजह से हमें हमारे समाज में सम्मान मिलता है जिससे हम समाज में सर उठा कर जी सकते हैं।

शिक्षा: उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक उपकरण

शिक्षा हम सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक उपकरण है। हम जीवन में शिक्षा के इस उपकरण का प्रयोग करके कुछ भी अच्छा प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा का उच्च स्तर लोगों को सामाजिक और पारिवारिक आदर और एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। शिक्षा का समय सभी के लिए सामाजिक और व्यक्तिगत रुप से बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। यह एक व्यक्ति को जीवन में एक अलग स्तर और अच्छाई की भावना को विकसित करती है। शिक्षा किसी भी बड़ी पारिवारिक, सामाजिक और यहाँ तक कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को भी हर करने की क्षमता प्रदान करती है। हम से कोई भी जीवन के हरेक पहलू में शिक्षा के महत्व को अनदेखा नहीं कर सकता। यह मस्तिष्क को सकारात्मक ओर मोड़ती है और सभी मानसिक और नकारात्मक विचारधाराओं को हटाती है।


                                                                     निष्कर्ष

शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को बड़े स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है तथा इसके साथ ही यह समाज में लोगों के बीच के सभी भेदभावों को हटाने में भी सहायता करती है। यह हमें अच्छा अध्ययन कर्ता बनने में मदद करती है और जीवन के हर पहलू को समझने के लिए सूझ-बूझ को विकसित करती है। यह सभी मानव अधिकारों, सामाजिक अधिकारों, देश के प्रति कर्तव्यों और दायित्वों को समझने में हमारी सहायता करती है।





बच्चों की अच्छी शिक्षा ही प्रत्येक माता-पिता की प्राथमिकता होनी चाहिए      


                                                                                                             











Wednesday, May 27, 2020

कैसे लगाए अपने बच्चे का पढ़ाई में मन ?




श्याम  के माता-पिता चाहते हैं कि श्याम रोज मन लगाकर पढ़े। लेकिन होता उल्टा है। पढ़ाई के लिए कहते ही श्याम के नखरे शुरू हो जाते हैं। वो एक जगह टिककर बैठ ही नहीं पाता। माता-पिता के लिए ये रोज का सिरदर्द है। तमाम कोशिशों के बाद भी वो श्याम का मन पढ़ाई के लिए नहीं लगवा पा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने मनोवैज्ञानिक की मदद ली। मनोवैज्ञानिक ने श्याम में बदलाव लाने की बजाए एक लिस्ट माता-पिता को अपने 
अंदर बदलाव लाने की थमा दी। दरअसल बच्चे अगर मन लगाकर नहीं पढ़ते तो इसकी जड़ें माता पिता के बर्ताव के अंदर ही छिपी होती हैं।

पढ़ाते समय डांटिए नहीं

अक्सर माता-पिता गलती ये करते हैं कि पढ़ते समय बच्चों को खूब डांट लगाते हैं। नतीजा ये होता है कि बच्चों के मन में पढ़ाई और डांट जुड़ जाते हैं। पढ़ने का मतलब उनके लिए डांट खाना हो जाता है और वो पढ़ाई से भागने लगते हैं। पढ़ाई को रोचक बनाइए। ऐसा माहौल पैदा कीजिए कि बच्चों के लिए पढ़ाई का मतलब एंजॉय करना हो।

 "नंबरों के कम्पीटिशन की दुहाई मत दीजिए बल्कि जो बच्चे ने सीखा है उसे सेलिब्रेट कीजिए। बच्चे में पढ़ाई को लेकर एक बार उत्सुकता पैदा हुई यकीन जानिए आपको कभी उसे किताब उठाने के लिए नहीं कहना पड़ेगा।"

बेहतर पढ़ाई के लिए टाइमटेबल बनाएं

स्कूल में काउंसलर डॉ शिवप्रिया का कहना है कि “याद रखिए कोई भी नियम धीरे-धीरे आदत बन जाता है। अगर आप टाइमटेबल के साथ पढ़ने पर जोर देंगे तो बच्चे को धीरे-धीरे वही आदत पड़ जाएगी।“ ध्यान दें कि बच्चा एक बार में कितनी देर एकाग्रता से पढ़ाई कर सकता है। जैसे किसी बच्चे में ये समय 50 मिनट है। शुरूआत में 50-50 मिनट के ब्लॉक बनाए जा सकते हैं। आपको नजर आएगा कि धीरे-धीरे एकाग्रता बढ़ रही है। इन ब्लॉक्स के बीच में बच्चे को ब्रेक दीजिए ताकि वो फिर से फ्रेश होकर पढ़ाई के लिए बैठ सके। सिर्फ पढ़ाई के घंटे ही तय नहीं करने हैं बल्कि खेलने के भी करने हैं ताकि बच्चों को पता रहे कि उन्हें रूटीन में हर चीज के लिए वक्त मिलने वाला है।

पढ़ाई के लिए स्टडी जोन बनाएं

मनोवैज्ञानिक जॉन एन ग्रोहोल कहते हैं कि ‘ऐसी जगह चुनें जो जहां बच्चे टीवी और गैजेट्स से दूर रह सकें। नियम बना लीजिए कि जहां बच्चे को पढना है वहां उसे गैजेट्स दिए ही ना जाएं। गैजेट्स और टीवी एकाग्र पढ़ाई की संभावनाओं पर पानी फेर देते हैं। छोटे बच्चे हैं तो उनकी पढ़ाई की जगह ऐसी रखें जहां आप उनके साथ रह सकें क्योंकि उनकी एकाग्रता का समय अक्सर कम होता है। बड़े बच्चों के लिए उनका स्टडी टेबल रहे तो बेहतर होगा। इसमें ये भी जोड़ा जा सकता है कि पढ़ाई के समय घर पर सभी अपना फोन साइलेंट पर रखेंगे।

च्छी पढ़ाई का ईनाम दीजिए

अगर गलती पर ज्यादा ध्यान देंगे तो गलतियां बढ़ेंगी और अगर अच्छी आदतों पर फोकस करेंगे तो अच्छी आदतों का ही विस्तार होगा। इसलिए जब भी बच्चा एक घंटा मन लगाकर पढ़े उसे बदले में ईनाम देना और तारीफ करना ना भूलें। आप घर पर प्वाइंट सिस्टम लागू कर सकते हैं। जैसे एक घंटे पढ़ाई के बदले दस प्वाइंट्स। दस प्वाइंट की कीमत आप अपने हिसाब से तय कर लें, सारे वीडियो गेम्स इसी मनोविज्ञान पर काम करते हैं। बच्चों को प्वाइंट इकट्ठा करते समय मजा आता है। वो मजे-मजे में पढ़ाई करेंगे और आप वक्त वक्त पर इस बच्चे को छोटे-छोटे गिफ्ट देकर खुश करते रहें। 

धन्यवाद !

Monday, May 25, 2020

कक्षा 10 वीं के बाद करियर कैसे चुने ?


यह जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय क्यों है ?



दसवीं के बाद कुछ भी करने का निर्णय छात्रों के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है. इस सम वे एक ऐसी राह पर खड़े होते हैं जहाँ आपको एक निर्णय लेना है जो आपके जीवन को सुखी और समृद्ध बना सके. यदि आप करियर से जुड़े इस निर्णय को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तथा कहीं न कहीं आपके मन में किसी तरह का संदेह हो,तो इस सम्बन्ध में निर्णय लेना काफी मुश्किल हो जाता है.साथ ही इस दौरान अगर आपने कोई गलत निर्णय ले लिया तो उसका परिणाम आपको जीवन भर भुगतना पड़ेगा.



आप को किन किन स्ट्रीम्स का चयन करना चाहिए ?



दसवीं के बाद सबसे कठिन निर्णय होता है स्ट्रीम का चुनाव करना. सही स्ट्रीम का चुनाव करना बहुत जरुरी है.कारण कि भविष्य के सभी निर्णय मुख्यतः आपके इसी निर्णय पर अवलंबित होते हैं.

किस विषय का चुनाव स्टूडेंट्स को करना चाहिए ?- कभी कभी स्टूडेंट्स अपने जीवन हर्ड मेंटालिटी ( झुण्ड मानसिकता) के दबाव में आकर उस स्ट्रीम का चुनाव कर लेते हैं जो उनकी रुची तथा क्षमता के बिलकुल विपरीत होते हैं लेकिन चूँकि उनके मित्र या जानकार भी इसे ही चुने हैं,इसलिए वे भी ऐसा करते हैं.लेकिन यह एक गलत प्रैक्टिस है और इसके परिणाम आपके लिए भयावह हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अपनी रुचि,योग्यता और क्षमता के अनुरूप ही किसी स्ट्रीम का चयन करें ताकि आप बेहतर रीजल्ट पा सकें. इसलिए सही स्ट्रीम के चयन में आपकी मदद हेतु दसवीं के बाद उपलब्ध कुछ महत्वपूर्ण स्ट्रीम्स का वर्णन आगे कर रहे हैं -

                                                       साइंस

सामान्यतः सबका पसंदीदा विषय – विज्ञानं अधिकांश स्टूडेंट्स का पसंदीदा विषय होता है और लगभग हर माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा विज्ञान विषय से ही पढ़ाई करे. यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे कई आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करती है और विभिन्न डोमेनों में शोध करने का अवसर भी प्रदान करती है. दसवीं के बाद विज्ञान विषय चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लेने के बाद आगे चलकर वे आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन ले सकते हैं. इसके विपरीत अगर आपने 12 वीं तथा ग्रेजुएशन आर्ट्स या कॉमर्स से की है तो आप भविष्य में साइंस नहीं ले सकते हैं जबकि साइंस स्ट्रीम वाले पुनः किसी भी स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं. 

जहां तक ​​ कक्षा 11 वीं और 12 वीं का सवाल है,तो आपको कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे आधारभूत विषयों का चयन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स द्वारा चुने गए इंस्ट्रक्शन के भाषा के आधार पर उन्हें एक अनिवार्य भाषा का भी चुनाव करना होगा. साथ ही क्लास में थियरी की पढ़ाई के अतिरिक्त लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल भी करना होगा.

यदि आप इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पीसीएम या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित को मूल विषयों के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन आगर आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं तो  आप पीसीएमबी या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित + जीवविज्ञान ले सकते हैं.

                                                  कॉमर्स

बिजनेस के लिए सर्वश्रेष्ठ - साइंस के बाद स्टूडेंट्स द्वारा सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीम है कॉमर्स. यदि स्टैटिक्स, फायनांस या इकोनॉमिक्स के फील्ड में जाना चाहते हैं तो आपको इस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा. अगर करियर की बात की जाय तो कॉमर्स स्ट्रीम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी, एकाउंटेंट्स, निवेश बैंकिंग और वित्तीय सलाहकार जैसे कुछ सबसे अधिक आकर्षक और उच्च भुगतान वाली नौकरियों में जाया जा सकता है हालांकि, इसकेलिए कक्षा 12 के बाद इन संबंधित डोमेन में प्रोफेशनल कोर्सेज का चयन करना होगा.

कॉमर्स स्टूडेंट्स के रूप में आपको बिजनेस इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और बिजनेस लॉ आदि मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स को कॉमर्स स्ट्रीम के एक हिस्से के रूप में अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, इनकम टैक्स, मार्केटिंग और जेनरल बिजनेस इकोनोमिक्स में आधारभूत प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. साइंस के स्टूडेंट्स की तरह ही इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा का चयन करना होता है.

                                                 आर्ट्स/कला / मानविकी

अवसर गैलरी - आर्ट्स आज भी स्टूडेंट्स का बीच बहुत काम पसंद किया जाने वाला विषय है जबकि इस क्षेत्र में अवसरों की भरमार है. लेकिन आजकल इस विषय को लेकर लोगों की धारणा बदली है तथा अधिकतर स्टूडेंट्स आर्ट्स विषय लेना पसंद कर रहे हैं. यह कुछ रोचक ऑफ-बीट और रोमांचक कैरियर के अवसर प्रदान कर रही है. पहले आर्ट्स विषय को उन्हीं स्टूडेंट्स के लिए सही माना जाता था जो आगे चलकर शोध में दिलचस्पी रखते थें लेकिन अब यह धारणा बिलकुल बदल चुकी है. आजकल आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास अन्य स्ट्रीम की भांति ही आकर्षक और संतोषजनक करियर विकल्प मौजूद हैं. एक आर्ट्स का स्टूडेंट जर्नलिज्म, लिटरेचर, सोशल वर्क, एजुकेशन और कई अन्य करियर विकल्पों का चयन कर सकता है.

जहां तक ​​विषयों का संबंध है, तो आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास विभिन्न प्रकार के विषयों के चयन का विकल्प होता है  जिनमें से समाजशास्त्र, इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र इत्यादि विषय शामिल हैं. इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा विकल्प का चयन करना पड़ता है.

इसके अतरिक्त कुछ अन्य बातें -पिछले दशक में  भारत के शिक्षा क्षेत्र में बहुत विविधता देखने को मिली है, इसकी वजह से दसवी के बाद कई सुनहरे करियर विकल्प मौजूद हैं. कई ऐसे कई शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, व्यावसायिक पाठ्यक्रम और यहां तक ​​कि कुछ प्रोफेशनल कोर्सेज भी हैं जिन्हें आप अपनी दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद चुन सकते हैं. एक दसवीं के छात्र होने के नाते यह हो सकता है कि आपको भविष्य में मिलने वाले सभी अवसरों तथा उसके अंतर्गत आने वाली चुनौतियों का सही ज्ञान न हो, तो ऐसी परिस्थिति में किसी काउंसेलर की मदद लें.

निर्णय लेने के दौरान किन किन बातों पर गौर करना चाहिए?

  1. अपनी रुचियों और जुनून का आकलन करें
  2. अपनी शक्तियों और कमजोरियों का विश्लेषण करें
  3. सही करियर विकल्प की पहचान करें
  4. अगर ऊपर दिये गए तीनों चरणों के बाद ही कोई असमंजस हो तो दूसरों की मदद लें |


आशा करता हूँ ये पोस्ट आपके लिए मददगार साबित हुई होगी,और यदि पसंद आया हो तो अधिक से अधिक बच्चों और माता-पिता के साथ साझा करें और उन्हें भी निर्णय लेने में मदद करें|

जल्द मिलतें एक नए पोस्ट के साथ |

धन्यवाद |

Sunday, May 24, 2020

ईद मुबारक । क्या आपको पता है ईद क्यों और कैसे मनाते हैं? इसकी शुरुआत कैसे हुई ?

पवित्र कुरान के मुताबिक, रजमान के पाक महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह इस दिन अपने बंदों को बख्सीश और इनाम देता है। इसलिए इस दिन को ईद कहते है। पूरे विश्व में ईद की खुशी पूरे धूमधाम से मानाई जाती है।

मुसलमान ईद के दिन खुदा का शुक्रिया अदा करते है कि उन्होंने महीनेभर उपावस रखने की ताकत दी। ईद पर एक खास रकम जिसे जकात कहते हैं जो गरीबों और जरूरतमंदों के लिए निकाल दी जाती है। नमाज के बाद परिवार में सभी लोगों का फितरा दिया जाता है, जिसमें 2 किलो ऐसी चीज दी जाती है जो प्रतिदिन रखने की हो।

क्यों मनाई जाती है ईद उल-फितर?

पहली ईद उल-फितर पैगंबर मुहम्मद ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया था। पैगंबर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्द में विजय प्राप्त की थी। उनके विजय होने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है।

कैसे मनाई जाती है मीठी ईद?


इस दिन घरों में खास तौर पर किमामी सेवइयां, शीर और दूध वाली सेवइयां बनाई जाती हैं  इन्हें एक-दूसरे के घरों में बांटा जाता है। बच्चों को ईदी या तोहफे दिए जाते हैं। नए-नए कपड़े पहनें जाते हैं। वहीं, रोज़ेदार मस्जिद जाकर ईद की नमाज़ अदा करते हैं।

दो ईद

इस्लाम धर्म में दो ईद मनाई जाती है। पहली मीठी ईद जिसे रमज़ान महीने की आखिरी रात के बाद मनाया जाता है। दूसरी, रमज़ान महीने के 70 दिन बाद मनाई जाती है, इसे बकरीद कहते हैं। बकरा ईद को कुर्रबानी की ईद माना जाता है। पहली मीठी ईद जिसे ईद उल-फितर कहा जाता है और दूसरी बकरी ईद को ईद उल-जुहा (Eid al-Adha) कहा जाता है।

ईद-उल-फितर एक रूहानी महीने में कड़ी आजमाइश के बाद रोजेदार को अल्लाह की तरफ से मिलने वाला रूहानी इनाम है। ईद समाजी तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है, यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आईना है। एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के प्रति उसकी कृतज्ञता से लगाया जा सकता है।

कुरान के अनुसार पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं तो अल्लाह एक दिन अपने उक्त इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को 'ईद' कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल-फितर का नाम देते हैं।

रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही 10वां माह शव्वाल शुरू होता है। इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्षभर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल-फितर का ऐलान होता है।

ईद मुबारक ।

WELCOME


नमस्ते !

आशा करता हूँ आप सभी अपने अपने घरों में सुरक्षित होंगे | आदर्श शिशु शिक्षा मंदिर विद्यालय हमेशा की तरह फिर से एक नयी पहल लेके आया है जिसका नाम है "आदर्श समाचार"  

आज भी बहुत सी जगह हैं जहां इंटरनेट तो है पर उसका किस हद तक सदुपयोग हो सकता है ये सोच पाना थोड़ा मुश्किल है, इसी बात को ध्यान में रखकर इसकी शुरुआत कर रहा हूँ । इंटरनेट पर सब कुछ होते हुये भी हम समझ नहीं पाते कि क्या देखे क्या सीखे । 

यह वेबसाइट आपके हर तरह के ज्ञान को बढ़ाने में मदद कर सकती है अगर आप इसे नियमित इस्तेमाल करते हैं। 

                                                                    

                                                   धन्यवाद ।

                                                                                                                             
 
                                                                                     
                                                                                             एडिटर
                                                                                      आदर्श समाचार 


                     




 



साइंटिस्ट बनने के लिए क्या करें (वैज्ञानिक कैसे बनें)?

अगर आप 10th class पास कर चुके हैं तो अब वक्त हैं करियर पर ध्यान देनें का | ज्यादातर मामलों में छात्रों को इसी समय यह निर्णय लेना होता हैं कि...